पठानकोट

पठानकोट हमले मे भारत ने क्या मजबूती और क्या कमजोरी दिखाई?

पठानकोट हमले में भारत ने क्या मजबूती और क्या कमजोरी दिखाई?

 

एक बार फिर वहीं हुआ जिसका हम सबको अन्दाजा और डर था। भारत ने पाक को क्रिसमस का गिफ्ट दिया तो पाक हमसे इतना प्रभावित हुआ कि उसने भी हमें खाली हाथ नहीं आने दिया और रिर्टन गिफ्ट के तौर उसने हमें न्यूईयर पर धमाकेदार रिर्टन गिफ्ट दिया। हम अपने गिफ्ट से खुशियां फैलाकर आये थे पर पाक ने अपने गिफ्ट से मातम और दहशतगर्दी फैलाई। आखिर ये कैसा पड़ोसी हैं जो हर बार हमारी पीठ में छुरा नहीं खंज्जर भोकने का प्रयास करता हैं। आखिर दो-दो शरीफ उनके देश में बैठे हैं फिर भी हम ही हर बार शराफत दिखाने का प्रयास करते हैं और बदले में अपने सैनिकों की शहादत का परिणाम पाते हैं। फिर भूलकर वही काम करने लगते हैं जिससे हमारे वीर जवान एक बार फिर शहादत की कगार पर खड़े हो जाये।

आखिर इस हमले से हमने क्या सीखा? हमने इस हमले में क्या मजबूती और क्या कमजोरी दिखाई?

भारत का मजबूत पक्ष

पाक के हमले ने भले ही हमारी कूटनीति चाल पर सवाल खड़े कर दिये हैं लेकिन इस हमले में हमने पूरी मुस्तैदी दिखाई जिससे जो गलती हम मुम्बई हमले के समय की थी वे इस हमले के दौरान न कर सकें। हमने हमले के तुरन्त बाद सारे सबूत पाक को दिये जिससे यह साबित हो रहा था कि यह हमला पार की तरफ से किया गया था।

 हमारे द्वारा दिये गये सबूत 

Ø  आतंकियो की ओर से पाकिस्तान के नम्बर पर किए गए फोन काँल्स।

Ø  आतंकियो के पास से मिला पाकिस्तान का फोन नम्बर।

Ø  पठानकोट में एयरफोर्स बेस पर हमले से पहले और बाद में पाकिस्तान को की गई फोन काँल्स।

Ø  आतंकियो के पास से बरामद हथियार भी पाकिस्तान में बने होने का दावा।

Ø  आतंकियो के पास मिली पाकिस्तानी बैटरी।

Ø  मारे गए 6 आतंकियो में से एक ने पाकिस्तान के एपकाँट ब्रैंड के जूते पहन रखे थे। यह ब्रैंड पाकिस्तान में काफी प्रचलित हैं।

हमने पाकिस्तान की पावरलिफ्टिंग टीम के 23 सदस्यीय टीम को जमशदेपुर में होने वाले सुब्रत क्लासिक इण्टरनेशनल ओपन पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए के वीजा नहीं देकर पाकिस्तान के हमले का करारा जवाब दिया है और साथ ही कार्यवाही न होने पर वार्ता रद्द करने की बात कह के पाकिस्तान के सामने अपना पक्ष मजबूती से रखा हैं।

भारत का कमजोर पक्ष

हमले की जानकारी होने के बावजूद आखिर हमने मुस्तैदी क्यों नहीं दिखाई?  आखिर हम क्यों जवानों की शहादत का इन्तजार करते रहते हैं?अपनी सुरक्षा में ढील क्यों दी? हमले के बाद जहाँ पक्ष -विपक्ष को साथ में खडे़ रहना चाहिए, जैसे पेरिस अटैक के बार वहाँ के पक्ष-विपक्ष साथ में खड़े थे, उस वक्त हमारे देश का पक्ष-विपक्ष आपस में बयानी वार कर अपनी सियासत चमकाने का प्रयास करने में व्यस्त थे।

इस हमले के बाद पाकिस्तान की कमियाँ भी एक बार फिर से सबके सामने उजागर हो गई।

पाकिस्तान का कमजोर पक्ष

पठानकोट हमले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि पाकिस्तान मे सरकार के शरीफ की शराफत नहीं चलती हां बल्कि सेना के शरीफ की शराफत चवती हैं पाकिस्तान की अन्दरुनी कमजोरी और कलह एक बार फिर विश्व के सामने आ गयी हैं। और अपने घर की फूट ने एक बार फिर उसकी फजीहत करा दी हैं।

पाकिस्तान द्वारा किए गए इस हमले के बाद भारत और पाक सम्बन्धों पर एक बार फिर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। पाक द्वारा किये गये हमले पर अमेरिका ने निन्दा की और पाक को कार्यवाही करने के लिए कहा पर अमेरिका द्वारा की गई इस निन्दा पर सवाल उठने लगे हैं क्योंकि अमेरिका हमेशा अपने फायदे के लिए पाक का प्रयोग करता हैं और अगर अमेरिका को आतंक से इतनी ही परेशानी हैं तो वे पाक को क्यों आर्थिक मदद देता है । ऐसे में अमेरिका की नियत पर सवाल उठने तो लाजमी हैं आखिर उसने पहले अवाज क्यों नहीं उठाई? पर पाक के इस हमले के बाद एक और बड़ी चीज देखने को मिली, वह यह कि कम से कम अमेरिका ने निन्दा तो कि पर चीन ने क्या किया? चीन ने तो हमले के बाद भारत के विरोध के बावजूद पाक को डैम बनाने में मदद कर अपनी चीनी चाल का परिचय देने का प्रयास किया है। ऐसे में अब समय आ गया है कि भारत अपने पड़ोसी की तरफ हाथ जरुर बढाये पर ऐसा विश्वास न करे को जो बाद में उसे धोखे के रुप में मिले। सतर्कता के साथ बढाया गया कदम देश को तो सुरक्षित रखेगा ही साथ अपनी छवि वैश्वक पटल पर भी मजबूत होगी। इसीलिए कम से कम पक्ष-विपक्ष को आपसी सियासत बन्द करके देशहित के लिए सोचना चाहिए और दोनो को देश के लिए ही सही कम से कम नीति निर्माण मे सहयोग करना चाहिए।

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