यूपी सरकार

यूपी में मंत्री मस्त सरकार पस्त !

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एकबार फिर लेकिन बहुत दिनों के बाद हल चल मची है। हलचल भी कोई छोटी मोटी नही है, ऐसी है जिसने कई लोगो की गद्दियाँ हिला दी है। उत्तर प्रदेश में कुछ समय पहले जिस तरह दादरी कांड में बीफ  को लेकर विवाद हुआ था उस समय से उत्तर प्रदेश एक बार फिर सुर्ख़ियो में बना हुआ है। हालाँकि यह बात अलग है कि दादरी कांड को लेकर जितनी जिम्मेदार केंद्र सरकार को ठहराया गया था उतना राज्य सरकार को नही ठहराया गया था। जबकि राज्य के पुलिस प्रशासन पर राज्य सरकार का ही अधिकार है और राज्य में अमन चैन के लिए राज्य सरकार ही जिम्मेदार होती है लेकिन दादरी कांड के बाद “उल्टा चोर कोतवाल को डांटे” वाली स्थिति उतपन्न हो गयी है और राज्य सरकार केंद्र पर ही सवाल उठाने लगी है।
                  खैर राज्य सरकार की पुलिस और प्रशासन पर कमजोरी को जनता ने जब नजर अन्दाज कर दिया तो शायद यूपी सरकार के मंत्रियो को यह बात हजम नही हुए और उन्होंने ऐसे ऐसे बयानों की बौछार की कि जनता को एक बार फिर राज्य सरकार की कमजोरियों और नाकामियो से परचित कराया। उत्तर प्रदेश की सरकार के लिए कहा जाता है कि वहाँ पर राज्य का शासन एक मुख्यमंत्री नही बल्कि साढ़े पांच मुख्यमंत्री चला रहे है और अक्सर इन साढ़े पांच मुख्यमंत्री में से कोई न कोई ऐसा बयान दे ही देता है कि सरकार की बची हुए साख पर भी सवाल उठने लगते है। हाल ही के घटनाओ की बात करे तो सरकार के इन मुख्यमंत्रियों की फौज ने सरकार की खूब फजीहत कराई है। राज्य के कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव ने राज्य के संवैधानिक पद पर बैठे राज्यपाल पर खूब बयानी हमला बोला और भूल गए कि भले ही राज्यपाल किसी पार्टी के नेता है पर वह इस समय राज्य के संवैधानिक पद पर बैठे है। शिवपाल यादव ने कहा कि राज्यपाल राम नाइक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ  के कार्यकर्ता की तरह बयान देते है और संवैधानिक पद के स्तर का ख्याल नही कर रहे है। शिवपाल यादव ने तो यहाँ तक कह दिया कि राज्यपाल कई बार साम्प्रदायिक संगठनो के कार्यक्रम में भी भाग लेते है और कहा कि उन्हें केंद्र में कोई मंत्री बना दिया जाये।सपा ने भी आरोप लगाया कि उरई में प्रदेश की कानून व्यवस्था पर तो राज्यपाल खूब बोलते है पर

                               “कभी दादरी और फरीदाबाद पर क्यों नही बोलते ?”

शिवपाल यादव के इस बयान से राज्यपाल पद की गरिमा पर सवाल खड़े हो गए है क्या किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति पर इस तरह प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाना कितना उचित है ? लेकिन यह तो केवल एक मंत्री की बात है इस तरह के बयान देने वालो की लम्बी लिस्ट है। अगर राज्य के प्रभावशाली मंत्री आजम खान की बात करे तो वह तो राज्य से भी ऊपर उठकर देश की आंतरिक समस्याओ से पूरे विश्व को परिचित करने पर लगे थे। आजम खान ने तो संयुक राष्ट्र संघ के महासचिव को पत्र लिखकर भाजपा और संघ पर आरोप लगाया कि संघ भारत को हिंदु राष्ट्र बनाने का प्रयास किया था । साथ ही यह भी कहा कि वे दादरी कांड को संयुक्त राष्ट्र में उठाये गये और फिर देश कि फजीहत कराये गये । इस बयान के बाद उपजे विवाद पर बाद में मुख्यमंत्री को सफाई देनी पड़ी थी लेकिन फजीहत होने के बाद । यूपी मे हाल ही मे 8 मंत्री को बर्खास्त किया गया और 9 मंत्रियो को निष्काषित किया गया है, हालाँकि अगले ही दिन 11 नए मंत्री बना दिए गए। इन मंत्रियो के निष्काशन को सरकार की कमजोरी को मजबूती में बदले के लिए प्रयोग के रूप में देख जा रहा है और उम्मीद की जा रही है की शायद इससे कुछ कानून व्यवस्था  में सुधर आ जाये लेकिन सरकार ने यह कदम उठने में बहुत देर कर दी है। यूपी में जिस तरह पंचायत चुनाव में सपा कार्यकर्त्ता की गुंडागर्दी देखने को मिली है और उन गुंडागर्दी पर जिस तरह पुलिस की लाचारी  देखने को मिली है उससे जनता में बहुत हद तक सरकार के लिए आक्रोश पैदा हो गया है सरकार यह बात धीरे -धीरे समझ भी रही है की अगर वे अब भी नही सम्भली तो शायद बहुत देर हो जाएगी और जनता अगले विधान सभा में उसे अच्छे से समझा भी देगी।
“वैसे इस समय यूपी में कानून व्यवस्था की स्थिति एकदम खराब हो गयी है और बिगड़ती कानून व्यवस्था से जनता में असंतोष का बीज फुट चूका है इसीलिए सरकार अपने मंत्रिमंडल में बदलाव कर यह साबित करने का प्रयास कर रही है की वे कानून व्यवस्था में सुधर के लिए प्रयासरत है लेकिन सरकार को न केवल कानून व्यवस्था बल्कि अपने मंत्रियो के बड़बोले बयानों पर भी रोक लगानी चाहिए जिससे जनता के सामने अपनी छवि में वह सुधार कर सके “

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By Prateek Dubey (Own work) [CC BY 3.0 (http://creativecommons.org/licenses/by/3.0)], via Wikimedia Commons




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